Loan EMI Rules 2025 – अगर आपने लोन लिया है और EMI चुकाने में परेशानी हो रही है, तो सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आपके लिए बेहद जरूरी है। बैंक और फाइनेंस कंपनियां EMI न भरने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन इसके भी कुछ नियम और सीमाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो लोन लेने और देने वाले दोनों के लिए अहम है।
EMI नहीं भरने पर क्या होगा?
कई लोग आसानी से लोन ले लेते हैं, लेकिन बाद में किसी कारणवश उसकी EMI भरने में दिक्कत होने लगती है। जब EMI का भुगतान समय पर नहीं किया जाता, तो बैंक और फाइनेंस कंपनियां कड़े कदम उठाने लगती हैं। मामला कभी-कभी गाड़ी या प्रॉपर्टी जब्त करने तक पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस पर साफ कहा है कि फाइनेंस कंपनियां कानूनी तरीके से वाहन या संपत्ति को जब्त कर सकती हैं, लेकिन उन्हें नियमों का पालन करना होगा।
क्या कहता है कानून?
अगर आपने कार लोन लिया है, तो EMI समय पर चुकानी होगी। EMI न चुकाने पर बैंक या फाइनेंस कंपनी वाहन को जब्त कर सकती है, क्योंकि जब तक लोन पूरी तरह से नहीं चुकाया जाता, तब तक गाड़ी पर असली मालिकाना हक बैंक या फाइनेंस कंपनी का ही रहता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति EMI नहीं चुका पा रहा है और फाइनेंस कंपनी ने नियमों के तहत इंतजार करने के बाद गाड़ी जब्त की है, तो यह कोई अपराध नहीं होगा। हालांकि, बिना नोटिस दिए गाड़ी उठाना गलत माना जाएगा।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर के एक व्यक्ति ने 2013 में लोन लेकर गाड़ी खरीदी थी। उसने शुरुआत में EMI दी, लेकिन बाद में बंद कर दी। पांच महीने तक कंपनी ने EMI का इंतजार किया, फिर गाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया।
इससे नाराज ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) में मामला दर्ज कराया। उपभोक्ता अदालत ने बिना नोटिस दिए गाड़ी उठाने को गलत माना और फाइनेंस कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
बाद में फाइनेंस कंपनी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। वहां सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ग्राहक ने EMI नहीं चुकाई थी, इसलिए फाइनेंस कंपनी के पास गाड़ी जब्त करने का कानूनी अधिकार था। हालांकि, बिना नोटिस दिए ऐसा करना गलत माना गया और फाइनेंस कंपनी पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
लोन रिकवरी के नियम क्या कहते हैं?
अगर कोई व्यक्ति लोन नहीं चुका पाता है, तो बैंक और फाइनेंस कंपनियां सीधे कार्रवाई नहीं कर सकतीं। कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन जरूरी है।
- लोन रिकवरी एजेंट किसी भी ग्राहक से दुर्व्यवहार नहीं कर सकते।
- वे रात के समय कॉल नहीं कर सकते और बिना सूचना दिए घर पर नहीं आ सकते।
- बिना उचित सूचना और कानूनी प्रक्रिया के किसी ग्राहक को डिफॉल्टर घोषित नहीं किया जा सकता।
बैंक और फाइनेंस कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक और फाइनेंस कंपनियां मनमानी तरीके से किसी व्यक्ति को डिफॉल्टर घोषित नहीं कर सकतीं। अगर कोई ग्राहक लोन नहीं चुका पा रहा है, तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
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अगर कोई बैंक या फाइनेंस कंपनी किसी व्यक्ति को बिना सूचना दिए ब्लैकलिस्ट कर देती है, तो उसका CIBIL स्कोर खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो जाएगा।
क्या सीख सकते हैं इस फैसले से?
अगर आपने लोन लिया है, तो कोशिश करें कि EMI समय पर भरें। अगर किसी कारणवश आप EMI चुकाने में असमर्थ हैं, तो सीधे बैंक या फाइनेंस कंपनी से बात करें और समाधान निकालें।
अगर बैंक आपकी कोई बात नहीं सुन रहे हैं और आपको परेशान कर रहे हैं, तो कानूनी तरीके से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उपभोक्ता अदालत में जाने का भी विकल्प है।
यह फैसला उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जो समय पर EMI नहीं भर पाने की वजह से परेशान हैं। हालांकि, यह उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जो लोन लेने के बाद भुगतान को गंभीरता से नहीं लेते।
अब सवाल यह है कि क्या बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को EMI न भरने वालों के लिए और लचीला होना चाहिए, या फिर नियमों को और सख्त किया जाना चाहिए?